बोले योग गुरु,यूजीसी एक्ट से सामाजिक समरसता का ढांचा चरमराने का खतरा,जातिवाद धर्म नहीं राजनीति की देन

बोले योग गुरु ••••यूजीसी एक्ट से सामाजिक समरसता का ढांचा चरमराने का खतरा ••••जातिवाद धर्म नहीं राजनीति की देन 

विरेन्द्र चौधरी


 सहारनपुर।आहत हूं! मोदी जी जैसे विवेकी व  संगठनात्मक शक्ति के धनी व्यक्ति की सरकार में शिक्षा व समरसता में जहर घोलने वाला यूजीसी एक्ट लाए जाने से जो सामाजिक समरसता में जहर घोलने वाला एक राष्ट्रघाती और राजनेता रूप से उनके स्वयं के लिए भी आत्मघाती कदम है। जाति आधारित भेदभाव, शोषण व उत्पीड़न तो किसी के साथ भी नहीं होना चाहिए तो ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्यों के साथ ही क्यों? ये तो जाति के आधार पर न किसी से कुछ सुविधा मांगते और  ही नहीं कोई विशेष दर्जा बल्कि इसके विपरीत इनके द्वारा दिए जाने वाले कर से सभी के विकास में योगदान दिया जाता है।  उन्होंने बेबाक कहा कि देश में जातिवाद धर्म नहीं राजनीति की देन है अतः राजनीतिज्ञों को कर्म की राजनीति करनी चाहिए धर्म और जातियों की नहीं।

    योग गुरु पदमश्री स्वामी भारत भूषण ने कहा कि प्रश्नगत यूजीसी एक्ट से सामाजिक समरसता का ढांचा चरमराने का खतरा पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि निश्चित रूप से यूजीसी में जरूर कुछ ऐसे लोग होंगे जो मोदी सरकार के समाज को जोड़ने और संगठित करने के प्रयास को बेअसर करना चाहते हैं, उन्होंने कहा कि उत्पन्न स्थिति का दोष तो सरकार पर ही आएगा और इसका नुकसान भी सरकार को ही झेलना होगा। यदि आयोग की मंशा सही होती तो वह इस एक्ट को कुछ जातियों तक ही सीमित न रखता। आज मुखर हुए पद्मश्री योगगुरु स्वामी भारत भूषण ने  कहा कि चिंतित हूं कि इससे मोदी सरकार की छवि धूमिल होने के साथ ही उनके सामाजिक एकता और समरसता के प्रयासों को पलीता लगेगा और देश कमजोर होगा।

    योग गुरु ने कहा कि हम भले ही इस बात पर गर्व जताते रहें  कि आज विविध क्षेत्रों में दुनिया की अनेक  नामचीन प्रतिभाएं भारतीय हैं लेकिन इस सच्चाई से कैसे आंख मोड़ लें कि प्रति वर्ष ऐसी लाखों युवा सवर्ण प्रतिभाएं अब देश में उनकी प्रतिभा की कद्र न होने के कारण मजबूरी में भारत से पलायन कर रही हैं। उन्होंने सरकार के संरक्षण में देश में जातिगत भेदभाव की शिकार योग्य प्रतिभाओं की उपेक्षा व तिरस्कार को चिंता का विषय बताया। 

     स्वामी भारत भूषण ने दुख: जताते हुए कहा कि आयोग के संविधान की मूल भावना के विपरीत लिए गए इस निर्णय ने विद्या मंदिरों से शिक्षा का माहौल बिगाडकर इन्हें जातिगत विद्वेष बढ़ाने और कथित सवर्णों को सताने व जातिवाद का शिकार बनाने का अखाड़ा बना दिया है। उन्होंने सामाजिक सुरक्षा के समान अधिकार और समरसता के व्यापक हित में प्रधानमंत्री से तत्काल हस्तक्षेप करने और उनकी नाक के नीचे हुई इस बड़ी चूक को तत्काल संवारने का आग्रह भी किया।

Comments