देश संविधान और कानून से चलेगा, भड़काऊ बयानों से नहीं: विकास त्यागी
विरेन्द्र चौधरी विनय कुमार
सहारनपुर/देववृंद । जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी द्वारा दिए गए हालिया बयान पर बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी ने कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे बेहद गैर-जिम्मेदाराना, भड़काऊ और समाज को बांटने वाला बताया है। विकास त्यागी ने कहा कि "मुसलमान न कभी झुका है और न झुकेगा" जैसे जुमलों का इस्तेमाल कर मौलाना मदनी देश के आम मुसलमानों को भड़काने, उन्हें मुख्यधारा से अलग-थलग करने और समाज में बेवजह टकराव पैदा करने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं। मदनी का यह रुख साफ करता है कि उनकी वास्तविक आस्था न तो भारत की संप्रभुता में है और न ही देश के पवित्र संविधान में, इसीलिए वे केवल एक वर्ग विशेष को उकसाने के लिए ऐसे उल्टे-सीधे बयान देते रहते हैं। मौलाना मदनी कोई पहली बार ऐसा नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे पूर्व में भी कई बार देश व संविधान विरोधी बयान देकर मंचों से तालियां बटोर चुके हैं, जिससे उनकी असल मंशा पूरी तरह उजागर हो जाती है कि वे देश के भीतर सद्भाव और व्यवस्था को किस तरह प्रभावित करना चाहते हैं।
पूर्व प्रांत संयोजक ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो लोग अपनी राजनीति चमकाने और खुद को रहनुमा साबित करने के लिए बात-बात पर संविधान की दुहाई देते हैं, वही देश के कानून, न्यायिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं को इस तरह की भाषा बोलकर खुली चुनौती देने से बाज नहीं आते। भारत का महान संविधान देश के प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार और सुरक्षा देता है, लेकिन अधिकारों की इस आड़ में किसी भी प्रकार की मजहबी कट्टरता, तुष्टिकरण या भड़काऊ एजेंडे को देश कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। विकास त्यागी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह देश किसी व्यक्तिगत अहंकार, मजहबी उन्माद या भड़काऊ बयानों से नहीं, बल्कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर द्वारा रचित पवित्र संविधान और कानून के शासन से संचालित होता है। यदि कोई नेता या संगठन यह सोचता है कि वह ऐसी भड़काऊ बयानबाजी करके और भीड़ को उकसाकर देश की कानून व्यवस्था को झुका देगा या जांच एजेंसियों को डरा देगा, तो यह उसकी सबसे बड़ी भूल है क्योंकि तुष्टिकरण का दौर अब देश से पूरी तरह समाप्त हो चुका है और राष्ट्र की सुरक्षा तथा संप्रभुता के आगे सबको नतमस्तक होना ही पड़ेगा।

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